इस आयुर्वेदिक उपाय से खून की कमी को सिर्फ 8 दिन में करें जड़ से खत्म

दोस्तों, खून की कमी आजकल बहुत ही आम समस्या हो गयी है। 60 % बच्चे, 50% महिलाएं और 25 पर्सेंट पुरुषों में आज की तारीख में खून की कमी की शिकायत है। खून की कमी यानी अनीमिया हमें तब होता है जब हमारे खून में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। हीमोग्लोबिन का मुख्य काम है कि वह ऑक्सीजन को शरीर के कोने कोने में पहुंचाता है और अगर ऑक्सीजन ही कम पहुंचे तो न सिर्फ हर एक अंग कमजोर पड़ने लगता है, बल्कि शरीर की शक्ति भी खत्म होने लगती है। 

तो आखिर हीमोग्लोबिन होना कितना चाहिए? पुरूषों  में 13. 5  से लेकर 17 ग्राम डेसीलीटर हीमोग्लोबिन की हेल्दी रेंज मानी जाती है। यही महिलाओं में 12 से लेकर 15. 5  तक मानी जाती है। 

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इस आयुर्वेदिक उपाय से खून की कमी को सिर्फ 8 दिन में करें जड़ से खत्म 

1 खून की कमी के लक्षण
2 खून की कमी क्यों होती है?
3 खून की कमी को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक घरेलू उपाय
4 इस जूस को बनाने और सेवन करने का सबसे अच्छा तरीका
5 इस जूस को पीने के लिए सर्वोत्तम समय
6 8 दिन ही क्यों? (निष्कर्ष)


खून की कमी के लक्षण

अब जब यह हीमोग्लोबिन रेंज से नीचे चला जाता है तो खून की कमी हो जाती है और इसकी वजह से शरीर में कुछ खास लक्षण सामने आते हैं। 

जैसे हमेशा थकान महसूस होना, काम में मन न लगना, थोडा सा ही चलने फिरने से सांस फूलने लगना, दिल की धड़कन तेज हो जाना, चक्कर आना, हाथ पैर ठंडे होना, सिर में दर्द होना, आंखों में नीचे की तरफ सफेदी आना, चेहरा बेजान सा पीला पड़ना, बाल झड़ने लगना, नाखून जल्दी टूटना, मूड चिड़चिड़ा होना और चॉक, बर्फ या मिट्टी खाने की इच्छा होना। 

अगर आपको भी कुछ ऐसे ही लक्षण महसूस होते हैं तो यह खून की कमी की ओर इशारा कर रहे हैं। 


खून की कमी क्यों होती है?

दोस्तों , खून की कमी के पीछे जो सबसे बड़ा कारण है वह है आयरन की कमी होना। दोस्तों, क्योंकि हीमोग्लोबिन बनाने के लिए शरीर को आयरन की जरूरत पड़ती है, आयरन अगर कम होगा तो हीमोग्लोबिन ज्यादा नहीं बनेगा जिससे खून की कमी होगी। 

इसलिए अगर आप हरी सब्जियां कम खाते हैं या लोहे के बर्तन का इस्तेमाल नहीं करते तो आपको आयरन की कमी होने के चांस बढ़ जाते हैं। फिर महिलाओं को माहवारी में ओवर ब्लीडिंग होना या बहुत ज्यादा चाय कॉफी पीने से भी खून की कमी शरीर में हो जाती है। 

लेकिन अक्सर लोग खून की कमी को पूरा करने के लिए जो गलती करते हैं वह यह कि सिर्फ आयरन के सप्लीमेंट लेने लगते हैं। बहुत बार यह सप्लीमेंट या तो सूट नहीं करते या फिर असर नहीं करते। वो इसलिए दोस्तों क्योंकि आयरन को अच्छे से एब्जॉर्ब होने के लिए बॉडी को विटामिन C  बहुत जरूरी है। आप सिर्फ आयरन लो और बॉडी को विटामिन C  मिले ना तो फायदा नहीं होगा। 


खून की कमी को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक घरेलू उपाय

लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं। आज मैं आपसे शेयर करना चाहता हूं आयुर्वेद की संहिताओं में मौजूद एक ऐसा जूस जिसे आप घर पर बड़े आराम से बना सकते हैं तीन सिंपल सामग्री से और जो आपके हीमोग्लोबिन को महज आठ दिन में बढ़ा देगा। 

दोस्तों इस जूस को बनाने के लिए जो आपको पहली चीज चाहिए वो है बीटरूट यानी चुकंदर। चुकंदर में ना सिर्फ भरपूर मात्रा में आयरन होता है बल्कि इसमें फॉलिक एसिड की क्वांटिटी भी काफी ज्यादा होती है, जिससे खून की कमी बहुत जल्दी पूरी होती है। 

दोस्तों, यह समझ लीजिए कि खून की कमी पूरी करने के लिए चुकंदर सर्वोत्तम है। शोधों  से पता चलता है कि चुकंदर शरीर में ऑक्सीजन को बढ़ाता है जिससे जल्दी थकान नहीं होती और शरीर में कहीं भी इन्फ्लेमेशन हो तो उसे भी ठीक करता है। 

दूसरी सामग्री जो आपको चाहिए वो है गाजर। दोस्तों गाजर में बीटा कैरोटीन होता है जिससे शरीर विटामिन A बनाता है और विटामिन A  हीमोग्लोबिन निर्माण में बहुत सहायक है। आधुनिक अध्ययन ने साबित किया है कि गाजर के जूस से खून तो बढ़ता ही है साथ में इससे स्किन, हार्ट और लिवर हेल्थ भी अच्छी होती है। 

तीसरा और आखरी सामग्री  जो हमें चाहिए वो है आमला। दोस्तों आमला ना सिर्फ खून को बढ़ाता है बल्कि खून को साफ़ भी करता है। ये हम जान ही चुके हैं कि विटामिन C  कितना जरूरी है खून की कमी को पूरा करने के लिए और जितना विटामिन C  40 संतरों में होता है उतना सिर्फ एक आमला में होता है और यही नहीं आमला में आयरन भी होता है और इसे साथ में डालने से जूस को एक टैंगी फ्लेवर भी मिलता है। 


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इस जूस को बनाने और सेवन करने का सबसे अच्छा तरीका

अब इन तीन सामग्रियाँ का पता तो हमे चल गया लेकिन अब जानते हैं कि इस जूस को बनाने का और पीने का सही तरीका क्या है। दोस्तों, इस जूस को बनाने के लिए आपको एक माध्यम आकर का चुकंदर लेना है 100 से 150  ग्राम का, गाजर आपको लेनी है 200 से 250 ग्राम। 

कोशिश करें कि आप नारंगी रंग की जगह लाल गाजर का इस्तेमाल करें और एक आमला ले ले और उसको काट कर उसकी गुठली अलग कर दें। बस अब इन तीनों चीजों को थोडे से पानी के साथ ब्लेंडर में पीस लें। जब अच्छे से पीस जाए तो उसे पतली छन्नी या सूती कपड़े से छान लें। 

वैसे दोस्तों अगर आप चाहे तो इस जूस को बिना छाने भी पी सकते हैं। न्यूट्रिशन और फाइबर बर्बाद नहीं होंगे लेकिन अगर ऐसे आपको पीना मुश्किल लगे तो छान कर पिएं। बहुत ही टेस्टी होता है ये नैचुरली खट्टा मीठा जूस । फिर भी अगर आपको इसे और मीठा करने का मन करे तो आप इसमें गुड या गुड़ पाउडर ही डालें। 


इस जूस को पीने के लिए सर्वोत्तम समय

आइये अब जानते हैं कि इस जूस को आपको कब पीना है। दोस्तों इस जूस को पीने का सर्वोत्तम समय है सुबह नाश्ते से आधा या एक घंटा पहले। जैसे आप सुबह उठे पानी पीकर फ्रेश हो जाएं और उसके बाद इस जूस को अगर आप पिएंगे तो आपको इसका भरपूर फायदा मिलेगा। 

इसके अलावा आप इस जूस को दो आहारों के बीच में भी पी सकते हैं। जैसे नाश्ते के दो घंटे बाद और लंच से एक घंटा पहले या फिर लंच के दो घंटे बाद। ये ध्यान रखें कि इस जूस को आपने शाम को 06:00 बजे के बाद नहीं पीना है। इससे आपको इसका पूरा फायदा नहीं मिलेगा। 

एक और चीज जो आपको ध्यान देनी चाहिए वो ये कि जूस को कभी भी जल्दी में ना पिएं बल्कि धीरे धीरे पिए। इससे यह शरीर में अच्छे से एब्जॉर्ब हो जाएगा और पूरा फायदा मिलेगा। 

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दोस्तों अगर आप इस जूस को लगातार आठ दिन पी लें तो न सिर्फ हीमोग्लोबिन बढ़ जाएगा बल्कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी बढ़ जाएगी। स्किन पहले से साफ और निखरी हुई महसूस होगी, शरीर में ताकत बढ़ जाएगी। बाल झड़ना यहां तक कि काले होंठ भी गुलाबी होने लगेंगे। 


निष्कर्ष 

वैसे आप सोच रहे होंगे कि आठ दिन ही क्यों? इसके पीछे क्या कॉन्सेप्ट है? दोस्तों आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में सप्त धातु होती है और हर एक धातु बनने में लगभग 4 से 5 दिन लगते हैं। इन धातुओं में पहली धातु है रस और दूसरी जो धातु है वो है रक्त यानी ब्लड। 

इसलिए आठ दिन लगातार इस जूस का सेवन करने से आपकी रक्त धातु पर इसका असर दिख जाएगा। आप ब्लड टेस्ट करवाकर बिफोर आफ्टर चेक भी कर सकते हैं। बाकी यह जूस फायदे की चीज है, बेहतर होगा अगर आप इसे लगातार 15-20 दिन या महीना भी पी लें ताकि इसका और भी फायदा मिले। सर्दी के दिनों में तो ये जूस आपको बड़ी आसानी से किसी भी जूस की दुकान पर मिल जाएगा।

Ethan

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