गंभीर बीमारियों से बचना है तो पेट साफ़ करने के ये घरेलू तरीके सीखें

दोस्तों, आयुर्वेद के अनुसार तो आपको जितना समय यूरिन पास करने में लगता है बस लगभग उतना ही समय मल पास करने में भी लगना चाहिए। लेकिन आजकल न जाने कितने लोगों की यह समस्या है कि 15-20 मिनट टॉयलेट में बैठे रहने के बावजूद भी प्रेशर नहीं बनता। बहुत जोर लगाना पड़ता है और करने के बाद भी पूरी संतुष्टि महसूस नहीं होती। 

अगर ऐसे ही कुछ लक्षण आप भी महसूस करते हैं तो जान लीजिए कि आपकी आंतों में गंदगी इकट्ठी होती जा रही है और यह ना सिर्फ आपकी आंतों को कमजोर बना रही है बल्कि इससे छोटी से लेकर बड़ी समस्याएं पनपती है। 

Clear Stomach Waste Naturally


आंतों को साफ रखने में बेहद कारगर है यह घरेलू उपाय


Serial Number1 Topic Covered
1 पेट की अत्यधिक गंदगी के दुष्प्रभाव
2 कब और कितना पानी पीना चाहिए?
3 क्यों बहुत जरूरी है फाइबर
4 कौन सा व्यायाम सर्वोत्तम है?
5 गलतियाँ जो समस्याओं का कारण बनती हैं
6 पेट की गंदगी को प्राकृतिक रूप से साफ करने का आयुर्वेदिक उपाय


पेट की अत्यधिक गंदगी के दुष्प्रभाव

मुंह से बदबू आना, गैस पास होने पर बहुत गंदी बदबू आना, खाना खाते ही पेट फूल जाना, भूख कम लगना,  त्वचा पर दाग फोड़े फुंसी होने लग जाना और बाल झड़ना इसके इसके शुरुवाती लक्षण हैं। लेकिन ध्यान ना दें तो यही आगे जाकर आईबीएस, पाइल्स और पेट के अल्सर जैसी समस्या पैदा कर देती है। 

इसलिए यह बहुत ही जरूरी है कि आप इस समस्या को समझें ताकि इसे जड़ से ठीक कर सकें। तीन ऐसी चीजें हैं जिन पर अगर आप ध्यान दें तो आपकी यह समस्या 100 प्रतिशत ठीक हो जाएगी। और आखिर में बात करेंगे एक प्राकृतिक घरेलू उपाय की। 



कब और कितना पानी पीना चाहिए?

सबसे पहली चीज जिस पर आपको ध्यान देने की जरूरत है वह है पानी। अगर आप पर्याप्त मात्रा में पानी पीते हैं तो आपकी आंतों में तरल पदार्थ भी ठीक रहेगा। तरल पदार्थ ऊपर की तरफ होने से जो आंतों में मल है यानी जो स्टूल है, वह हमेशा सॉफ्ट रहता है। 

विज्ञान ऐसा मानती है कि आप कितनी आसानी से स्टूल को पास कर पाएंगे, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका स्टूल आंतों में जाकर सॉफ्ट रहता है या ड्राय हो जाता है। अब आप देखिए कि चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और एल्कोहल ये चारों बेवरेज है। मतलब वो जो अंदर का पानी सुखा देती है और आंतों को ड्राय करती है। इसलिए इन्हें आपको कम करने की जरूरत है। 

जो आप सुबह उठते ही चाय कॉफी पीते हैं उसकी जगह गर्म पानी पिए। पूरा दिन जब हो सके गुनगुना पानी पीएं नहीं तो रूम टेम्परेचर पर पानी पिए। बर्फ वाला ठंडा पानी भी ड्राईनेस करता है। ब्रेकफास्ट से एक घंटे बाद और लंच से आधा घंटे पहले तक खूब पानी पिए। इसी तरह लंच के एक घंटे बाद भी याद करके पानी पिएं। 

दोस्तों, पानी के सेवन को बढ़ाने के लिए आपकी डेली डाइट में फ्रेश फ्रूट्स होने ही चाहिए। अंगूर, अमरूद, पका हुआ केला, थोडी मात्रा  में पपीता, छिलके समेत सेब और चार अंजीर भिगोकर पानी के साथ लेने से आंतें मुलायम होती हैं और सुबह एक ही बार पेट खुलकर साफ होता है। 


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क्यों बहुत जरूरी है फाइबर

दोस्तों, बहुत बार पुराना मल आंतों में चिपक जाता है और नए स्टूल को भी पास नहीं होने देता। ऐसे में डाइटरी फाइबर झाड़ू का काम करता है जो ना सिर्फ आंतों में चिपके मल को खींच बाहर निकालता है बल्कि स्टूल की मात्रा को भी बढ़ता है। समझने वाली बात यह है कि डाइट में फाइबर की कमी होती ही तब है जब हम मैदे से बनी चीजों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने लग जाते हैं। 

समोसा, कचोरी, पिज्जा, बर्गर, मोमोज, ब्रेड भटूरे इन सब में फाइबर ना के बराबर होता है। अब यही सब चीजें जाकर आंतों में चिपक जाती हैं। जो पहले गैस करती हैं बाद में कब्ज कर देती हैं। आपको इस फास्ट फूड को जितना फास्ट हो सके कम करना चाहिए। 

जिस आटे से रोटी बनाते हैं उसमें भी थोड़ा चोकर यानी व्हीट ब्रान मिक्स कर लें। थोड़ी मात्रा में बाजरा या छोले का आटा मिक्स कर लेंगे तो न सिर्फ रोटी में फाइबर बढ़ेगा बल्कि रोटी ज्यादा पौष्टिक भी हो जाएगी। 

दोस्तों, ओट्स एक ऐसा अनाज है जिसमें भरपूर मात्रा में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर होता है। इसका आप नाश्ते में सब्जियां डालकर नमकीन दलिया बना सकते हैं या दूध में ओटमील बनाकर खा सकते हैं। दालों में भी जितना हो सके धुली दालों की जगह छिलके वाली दालें खाएं। फल और हरी सब्जियों में भी फाइबर होता है। 


कौन सा व्यायाम सर्वोत्तम है?

अब बात करते हैं एक्सरसाइज की। दोस्तों, 60,000 महिलाओं पर एक शोध हुई जिसमें पाया गया कि जिन महिलाओं ने थोड़ी भी एक्सरसाइज की उनको कब्ज की दिक्कत नहीं हुई। फिर जापान में 69,000 लोगों पर स्टडी हुई जिसमें फिर से यही बात सामने आई कि जिन लोगों का एक्टिव लाइफस्टाइल था उनके आंतों की मांसपेशियां बेहतर होने लगी , खून का प्रवाह बड़ा जिससे उन्हें कब्ज की समस्या  नहीं हुई। 

यहां तक कि रोज सिर्फ वॉकिंग करने से भी आपको फायदा होगा। लेकिन आयुर्वेद में एक व्यायाम है जिसे आप कहीं भी बैठकर 5-10 मिनट के लिए भी कर लें तो आपकी आंतों की हलचल बहुत तेजी से बढ़ जाएगी। वह है कपालभाति यानी रैपिड एक्सहैलेशन। 

लेकिन पेट साफ न होने की दिक्कत के चलते अगर आप इस कपालभाति को अपानवायु मुद्रा लगाकर करेंगे तो बहुत जल्दी फायदा होगा। 

अपानवायु मुद्रा


इस मुद्रा को लगाने के लिए इंडेक्स फिंगर को अंगूठे की छोर की ओर ले जाएं। फिर सेकंड और थर्ड फिंगर से अंगूठे के टिप को छुएं। बस इस तरह इस मुद्रा को लगाकर आप पांच मिनट भी कपालभाति कर लें तो आंतों में जो वायु के प्रकोप से मल रुका हुआ है वह आसानी से बाहर आने लगेगा। 

दोस्तों, कपालभाति इतना असरदार है कि इसे आयुर्वेद में तेज दौड़ने के बराबर माना गया है। पांच मिनट कपालभाति करने से पुरे शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, पेट और नीचे के अंगों की अच्छे से मसाज हो जाती है और पेट खुलकर साफ होता है। 


गलतियाँ जो समस्याओं का कारण बनती हैं

अब इससे पहले कि हम आयुर्वेदिक नुस्खे की बात करें कुछ ऐसी छोटी छोटी गलतियां हैं जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर जाते हैं लेकिन यह पेट साफ करने में दिक्कत करती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है बहुत तेज खाना। 

दोस्तों, अगर आप पांच मिनट में जल्दी जल्दी पूरी थाली खत्म कर देंगे तो उतना ही ज्यादा टाइम आपको टॉयलेट में बैठना पड़ सकता है। इसलिए आराम से 15-20 मिनट लगाकर चबा चबाकर खाना खाएं जिससे पेट को कम काम करना पड़े और खाना कहीं रुके नहीं। 

फिर खाना खाने का कोई फिक्स टाइम ना होना, बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना, आरओ वाला पानी पीना और बिना बात के पेट साफ करने वाली दवाइयों पर निर्भर रहने से भी लंबे समय में आंते इतनी कमजोर हो जाती हैं कि कॉन्स्टिपेशन क्रॉनिक मोड ले लेती है। इसलिए ऐसा ना हो आप पहले ही जल्दी सुधार की जगह मूल कारण से ही इस समस्या को खत्म कर दें। 


पेट की गंदगी को प्राकृतिक रूप से साफ करने का आयुर्वेदिक उपाय

आइए बात करते हैं उस आयुर्वेदिक नुस्खे की जो हंड्रेड परसेंट प्राकृतिक है, सुरक्षित है और जिसे आपको हफ्ते में एक ही बार करना है। किसी छुट्टी वाले दिन जैसे संडे को सुबह उठकर पहले थोड़ा पानी पी लें। फिर एक चम्मच सौंफ को एक गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक एक गिलास का आधा गिलास पानी न रह जाए। 

अब इसे छानकर रख लें। जब यह पानी हल्का गुनगुना हो जाए तो इसमें एक बड़ा चम्मच अरंडी का तेल यानी कैस्टर ऑयल मिला दें। मिलाने के बाद इसे एकदम से पी जाएं। कैस्टर ऑयल की सबसे बड़ी गुण यह है कि यह आपके शरीर में टिकता नहीं, इसे बाहर निकलना ही है और जैसे ही यह निकलेगा साथ में निकालेगा आपके आंतों में जमी हुई गंदगी ।

आपको एक, दो, तीन बार भी मोशन पास हो सकता है, पर इससे आपके पेट की पूरी सफाई हो जाएगी। आंतों को मुलायम करता हुआ कैस्टर ऑयल बाहर आएगा। बस इसे हफ्ते में एक ही बार करें और जब लगे कि प्रॉब्लम उतनी नहीं रही तो आप इसे 15 दिन में या महीने में एक बार भी कर सकते हैं।

Ethan

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