कैसे बनते हैं ₹5000 से ₹1.76 करोड़: Unveiling the Magic of SIP| Finance In Hindi

 Finance In Hindi: दोस्तो ज्यादातर हम सभी लोग यही चाहते है कि अपने पैसे को किसी ऐसी जगह पर invest किया जाए कि वो ज्यादा से ज्यादा ग्रो हो सके और कुछ समय बाद हमे एक अच्छा सा रिटर्न दे सके। लेकिन यहीं से शुरू होती है प्रॉब्लम की शुरुआत। क्योंकि हम सभी कन्फ्यूज होने लगते है और हमें समझ नहीं आता कि आखिर क्या है सबसे बेस्ट ऑप्शन। तो इसी बेस्ट ऑप्शन को जानने के लिए आज हम लाये हैं आप लोगों के लिए यह आर्टिकल । 

 

explaing power of SIP

What is SIP?

दोस्तों जब भी हम नया नया investment कर रहे होते हैं या फिर करने की सोच रहे होते हैं तो अक्सर हम सभी कन्फ्यूज होते हैं और एक बेस्ट ऑप्शन की तलाश कर रहे होते हैं। लगभग सारे ही फाइनेंशल एडवाइजर्स और सक्सेसफुल लोगों के अनुसार इस बेस्ट ऑप्शन का नाम है SIP यानी कि Systematic Investment Plan.

अभी आपको यह सुनने में थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड लग सकता है, मगर असलियत में ये बहुत ही सिंपल है। पूरे स्टॉक मार्केट में SIP  ही एकमात्र ऐसा तरीका है जो हमें बिना रिस्क के FD वगेरह जैसी चीजों से भी बेहतरीन रिटर्न देता है। 

और इसकी सबसे अच्छी बात ये है कि इससे आप कम से कम इनकम और कम से कम स्टॉक मार्केट की नॉलेज के बावजूद भी एक अच्छा और बेहतरीन रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। 

What is SIP?


दरअसल SIP  में आपको अपनी monthly income में से एक फिक्स्ड अमाउंट डिसाइड करना होता है और आपको ये डिसाइड करना होता है कि कितने सालों के लिए ये investment चालू रखनी है। 

बस इसके बाद आपको कोई टेंशन नहीं लेनी। न तो आपको रोज़ रोज़ स्टॉक मार्केट के फिगर्स को बैठकर एनालिसिस करना है और न ही हर महीने इन्वेस्टमेंट करने के लिए बैंक के चक्कर काटने हैं। बस एक बार के डिसीजन ने ही आपका सारा काम कर दिया। 

अब हर महीने जब भी आपके अकाउंट में सैलरी आया करेगी उसमे से वो फिक्स्ड अमाउंट ऑटोमेटिकली डिडक्ट होकर SIP में इन्वेस्ट हो जाया करेगा। अब आप सोच रहे होंगे कि ये तो कुछ EMI जैसा हो गया ,नहीं यह ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। 

SIP में आप जब चाहे तब अपनी इन्वेस्टमेंट को बंद कर सकते हैं और सबसे अच्छी बात ये है कि SIP बंद करने के बावजूद भी आपने जितना अमाउंट इन्वेस्ट किया है, बाकी समय के लिए वो पैसा भी लगातार ग्रो करता रहेगा। SIP में आपका पैसा Power of Compounding के थ्रू ग्रो करता है। तो चलिए दोस्तों हम आपको Power of Compounding एक मज़ेदार कहानी के माध्यम से बताते हैं । 



Understand the Power of Compounding from a Story


एक बार की बात है एक राज्य में बहुत ही क्रूर और घमंडी राजा हुआ करता था। वो खुद को दुनिया का सबसे बड़ा विद्वान और दूसरों को मूर्ख समझता था। साथ ही साथ वो अपनी प्रजा पर बहुत अत्याचार भी करता था। सारी प्रजा उसके अत्याचारों से बहुत ही परेशान थी और उसकी उल्टी सीधी हरकतों से तंग आ चुकी थी। सारे लोग उसे किसी भी तरह सबक सिखाना चाहते थे और उससे छुटकारा पाना चाहते थे। 

इसके लिए सारी प्रजा ने मिलकर योजना बनाना शुरू कर दिया। इस योजना के तहत उन्होंने राज्य के सबसे विद्वान एक लेखक को अपना लीडर चुना और उसे राजा के महल में भेज दिया। लेखक एक लंबा सफर तय करके राजा के महल में पहुंचा तो उसने देखा की राजा दरबार में सभी को खुला चैलेंज दे रहा है कि जो भी उसे डिबेट में हरा देगा वो उसे मुंह माँगा इनाम देगा। 

लेखक ने सोचा ये सबसे सही मौका है इस घमंडी राजा को सबक सिखाने का। वो दरबार की सबसे पहली पंक्ति में पहुँच गया और उसने राजा को डिबेट के लिए ललकारना शुरू कर दिया। राजा लेखक की इस हरकत को देख कर गुस्से में आ गया और वो डिबेट के लिए राज़ी हो गया। दोनों के बीच मुकाबला शुरू हुआ और ये मुकाबला कई दिनों तक चला परन्तु अंत में घमंडी राजा को हार का मुंह देखना पड़ा। 


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जब राजा हार गया तो उसने लेखक को कहा कि वो अपनी इच्छा जाहिर करे कि उसे इनाम में क्या चाहिए। लेखक ने उत्तर देते हुए कहा कि ज्यादा कुछ नहीं बस उसे अगले एक साल तक प्रत्येक दिन एक सोने का सिक्का सरकारी खजाने में से दिया जाए। मगर शर्त ये है कि सिक्के की संख्या हर दिन डबल होती रहनी चाहिए। 

राजा को ये सुनकर हंसी आ गई और वो बोला बस इतना ही। मैं तो सोच रहा था कि तुम कुछ बड़ा मांगोगे खेर जाओ तुम्हें दिया ये इनाम। अगले एक साल के लिए अब लेखक को इनाम मिलना शुरू हुआ। पहले दिन उसे सोने का एक सिक्का मिला, दूसरे दिन दो, तीसरे दिन चार, चौथे दिन आठ। ऐसा करते करते अगले 30 दिन यानि की मन के एन्ड में सिक्कों की संख्या बढ़कर 53 करोड़ से भी ज्यादा हो गई। 

अब राजा को एहसास हुआ कि ये उसने क्या कर दिया। फिर जैसे ही अगला महीना शुरू हुआ संख्या लगातार बढ़ती चली गयी और दूसरा महीना समाप्त होते ही सिक्कों की संख्या बिलियन और ट्रिलियन से भी आगे 576 quadrillion तक पहुँच चुकी थी और इतने सिक्के सरकारी खजाने में क्या पूरी दुनिया में नहीं थे। 




राजा का घमंड चूर चूर हो गया था। उसने अपनी हार स्वीकार कर ली और अपना सारा राज्य उस लेखक के नाम कर दिया। इस तरह राज्य की प्रजा को उस घमंडी राजा से मुक्ति मिल गयी और एक नया, अच्छा और विद्वान राजा भी मिल गया। ये सभी संभव हो पाया power of compounding से। इसी तरह power of compounding छोटे से छोटे इन्वेस्टमेंट से भी आपके करोड़पति और अमीर बनने के सपने को बड़ी ही आसानी से पूरा कर सकता है। 


Understand Power of Compounding from Real Life Example

चलिए एक live example देखते हैं। मान लीजिए कि आपकी अभी अभी नयी जॉब लगी है और आप महीने का ₹25,000 कमाते हैं। आप ने डिसाइड किया कि आप अपनी इस monthly income में से हर महीने ₹5,000 का इन्वेस्टमेंट SIP  में करना शुरू कर देंगे और इस इन्वेस्टमेंट को आप अगले 30 साल तक जारी रखेंगे। 

आपने हर महीने पाँच ₹5,000 SIP में लगाना शुरू कर दिए। पहले महीने आपका इन्वेस्टमेंट अमाउंट 5000 हुआ, दूसरे महीने 10,000, तीसरे महीने 15,000। ऐसे ही करते करते साल के अंत  तक आप ने टोटल ₹60,000 इन्वेस्ट कर दिए। 

साल दर साल ये इन्वेस्टमेंट चलता चला गया और बढ़ता चला गया। आप ने कभी भी इसके interest amount को नहीं निकाला और बिना कुछ छेड़छाड़ किए अगले 30 सालों तक इस SIP को आपने इसे ही कंटीन्यू रखा। इसका रिजल्ट ये हुआ कि आप ने इन तीन सालों में टोटल ₹18 लाख इन्वेस्ट कर दिए। अगर हम कम से कम रिटर्न रेट भी देखें तो SIP कभी 12% से कम का रिटर्न नहीं देता। उस हिसाब से 30 साल बाद आपको रिटर्न के रूप में पूरे 1 करोड़ 76 लाख रूपये मिलेंगे। 

explaining power of compounding


इसीलिए तो इसे कहा जाता है पावर ऑफ कंपाउंडिंग, जिसने आपके 5000 के एक छोटे से अमाउंट को करोड़ों में कनवर्ट कर दिया। दोस्तों आज के समय में जरूरी नहीं है कि आप के पास बहुत पैसा हो या कोई बड़ा बिजनेस हो तभी आप एक करोड़पति या अमीर इंसान बन पाएंगे। आप अपनी एक साधारण इनकम और नौकरी के से भी अपना यह गोल अचीव कर सकते हैं। 

बस जरूरी ये है कि आपको ये पता हो कि अपना पैसा कब और कहां इन्वेस्ट करना है। SIP के थ्रू कई तरह के फंड्स में इन्वेस्टमेंट किया जाता है। फिर चाहे वो Mutual funds हो, Exchange traded funds हो या फिर Index funds हो। 


What is a Mutual Fund? Finance In Hindi

म्यूचुअल फंड एक तरीके का Actively managing fund  है जहां पर expert fund manager इस बात का ख्याल रखता है कि आपके पैसे को किस कंपनी के म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना है जिससे एक बेहतर रिटर्न प्राप्त हो सके और वो टाइम टाइम पर मार्केट के डाटा और ग्राफ्स का एनालिसिस करता रहता है। इसके बदले वो आपसे एक Exit Fees चार्ज करता है और साथ ही म्यूचुअल फंड्स में आपके Expense ratio भी ज्यादा रहते हैं जो लगभग 0.5% से 3% तक होते हैं। 


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What is an Index Fund? Finance In Hindi

दूसरी तरफ इंडेक्स फंड एक passively managed fund है जिसमें एक्सपर्ट फंड मैनेजर आपके पैसे को इंडेक्स फंड्स में इन्वेस्ट करके छोड़ देता है। दरअसल इंडेक्स फंड एक ऐसा फंड है जो मार्केट में अवेलेबल टॉप कंपनीज को मिलाकर बनाया जाता है। 

हमारे देश में दो तरह के स्टॉक एक्सचेंज हैं। एक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange)और दूसरा है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(Bombay Stock Exchange), जहां से हमारा स्टॉक मार्केट ऑपरेट होता है। 

explaining index fund


NSE की टॉप 50 कंपनीज को मिलाकर एक index fund तैयार किया जाता है, जिसे हम सभी Nifty 50 के नाम से जानते हैं और BSE की टॉप 30 कंपनी को मिलाकर एक इंडेक्स फंड बनाया जाता है, जिसे हम सभी सेंसेक्स के नाम से जानते हैं और यही वो फंड थे जिनके ग्राफ को देखकर स्टॉक मार्केट में ये पता लगाया जाता है कि मार्केट ऊपर जा रही है या नीचे। 

अगर निफ्टी और सेंसेक्स का ग्राफ ऊपर जा रहा है तो मार्केट ऊपर जा रहा है और अगर इनका ग्राफ नीचे जा रहा है तो मार्केट नीचे जा रही है। 


Which is better? Mutual fund or Index fund 

अगर रिटर्न के हिसाब से बात की जाए तो पिछले सालों के एनालिसिस के हिसाब से mutual funds के मुकाबले index funds ने काफी बेहतर रिटर्न दिए हैं। क्योंकि यहां पर आपका पैसा उन कंपनीज में इन्वेस्ट हुआ है जो देश में सबसे टॉप पर हैं। साथ ही इंडेक्स फंड्स में आपको अपने एक्सपर्ट को कोई exit fee नहीं देनी पड़ती और इसका expense ratio भी 0.1%- 0.3%  के बीच में ही होते हैं। ग्राफ के हिसाब से इंडेक्स फंड्स ने लोगों को पिछले कुछ साल में 15% से भी ज्यादा का रिटर्न दिया है। 


3 Factors on SIP Returns


SIP के थ्रू किए गए इन्वेस्टमेंट पर मिलने वाले रिटर्न कैसे होंगे, ये तीन चीजों पर डिपेंड करता है। 

  1.  सबसे पहला कि आपने कितना अमाउंट इन्वेस्ट किया। 
  2.  दूसरा आपने वो अमाउंट कितने टाइम के लिए इन्वेस्ट किया 
  3. और तीसरा है कि उस amount को आपने कहां पर इन्वेस्ट किया। 

तो पहले अमाउंट की बात करें तो जितने ज्यादा अमाउंट की SIP आप शुरू करते हैं उतना ही ज्यादा अमाउंट आपको रिटर्न के रूप में मिलेगा। मगर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि आपको ज्यादा अमाउंट से ही SIP शुरू करनी चाहिए। आप ₹500 महीने से भी SIP की शुरुआत कर सकते हैं। 

factors affecting SIP returns


दूसरी बात है टाइम की, तो भारत में ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोग SIP की शुरुआत तो बड़े ही एक्साइटमेंट के साथ करते हैं, मगर पता नहीं क्यों ज्यादातर लोग उसे बीच में ही बंद कर देते हैं। भारत में ज्यादातर लोगों ने अपनी SIP को पाँच सालों के अंदर अंदर ही बंद कर दिया है, due to lack of patience

और कंपाउंडिंग के पावर को देखने के लिए आपका संयम रखना बहुत ही जरूरी है। तभी वो अपना मैजिक दिखा पाएगा। वरना शुरू में तो आपको यही लगेगा कि आपका पैसा ग्रो ही नहीं हो रहा। SIP एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट है, न कि शॉर्ट टर्म। इसके लिए आपका लॉन्ग टर्म तक वेट करना बहुत ही जरूरी हो जाता है। 

तीसरी जरूरी बात कि पैसा कहां इन्वेस्ट करना चाहिए तो उसके लिए आप अपने हिसाब से रिसर्च करके किसी भी अच्छे mutual fund or index fund में इन्वेस्ट कर सकते हैं। 


Final Words

तो दोस्तों आशा करता हूँ आज के हमारे इस article से आपको कुछ न कुछ financial knowledge मिली होगी। अपना मूलयवान समय निकाल कर आर्टिकल को अंत तक पढ़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। 

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Ethan

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